काल की काया है,
बाकी सब मोह माया है।
चक्र है समय का ,
कभी अमीर का कभी गरीब का।
कभी मीठा तो कभी कर्कश,
करता सबसे वह मटर्गाश।
ना कर तू इतना गुरूर,
उड़ जाएगा तेरा सुरूर।
क्योंकि काल की काया है,
बाकी सब मोह माया है।
ना हो तू उदास भूतकाल के विचार से,
ना भूल तू वर्तमान का आनंद रे।
भविष्य की सोच में चिंता को शरण मत दे,
काल तो है उन्नति और अवनती में।
क्योंकि काल की काया है,
बाकी सब मोह माया है।
जीव के सृजन का प्रयोजन भी वह है,
जीव के संहार का कारण भी वह है।
कभी है अनुकूल सफलता के रूप में,
कभी है प्रतिकूल विफलता के रूप में।
क्योंकि ये काल की काया है,
बाकी सब मोह माया है।